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Meri Kalam Mere Geet – 4

Author: Bhupendra Bhojraj Bhargava
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“परिवारिकी: मेरी कलम मेरे गीत – 4” परिवार, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखकर रचा गया एक आत्मीय हिंदी काव्य-संग्रह है। इसमें पारिवारिक जीवन के विविध भावों, अपनापन, स्मृतियों और संबंधों की गरिमा को सरल एवं प्रभावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया गया है।

“परिवारिकी: मेरी कलम मेरे गीत – 4” परिवार, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखकर रचा गया एक आत्मीय हिंदी काव्य-संग्रह है। जीवन की सबसे गहरी अनुभूतियाँ अक्सर हमारे अपने लोगों, साझा स्मृतियों और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी होती हैं। यही भाव इस पुस्तक की रचनाओं में सहज रूप से दिखाई देते हैं।

संग्रह में प्रस्तुत गीत और कविताएँ परिवार के अलग-अलग रूपों, अपनापन, सम्मान, जिम्मेदारियों और भावनात्मक जुड़ाव को शब्द देते हैं। कहीं रिश्तों की मधुरता है, तो कहीं समय के साथ बदलती परिस्थितियों का अनुभव। सरल भाषा और आत्मीय अभिव्यक्ति के कारण पाठक इन रचनाओं से आसानी से जुड़ पाते हैं। कई कविताएँ जीवन की उन छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान आकर्षित करती हैं, जिन्हें हम व्यस्त दिनचर्या में अक्सर महसूस नहीं कर पाते।

लेखक Bhupendra Bhojraj Bhargava ने संवेदनाओं को स्वाभाविक और प्रभावी शैली में प्रस्तुत किया है। हिंदी कविता, गीत और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह संग्रह पठनीय है। यह पुस्तक रिश्तों की गरिमा और परिवार के महत्व को भावपूर्ण शब्दों में सामने लाती है।

Author Name Bhupendra Bhojraj Bhargava
Publisher True Sign Publishing House
Pages 110
Category Poetry & Drama
Language Hindi
Text Color Black & White
Dimensions 5 x 8 inch

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