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Suniye Dronacharya Aur Aparajita
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Suniye Dronacharya Aur Aparajita

Rangmanch, Samvad Aur Samajik Chetna Ke Natak

Author: Vijay Pandit
ISBN:
सुनिए द्रोणाचार्य और अपराजिता संवाद, रंगमंच और सामाजिक चेतना से जुड़ी हिंदी नाट्य-पुस्तक है। इसमें पात्रों, परिस्थितियों और विचारों के माध्यम से समाज, मूल्य और मानवीय संघर्षों को समझने की दिशा मिलती है। हिंदी नाटक और गंभीर रंगमंचीय साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयुक्त है।

“सुनिए द्रोणाचार्य और अपराजिता” संवाद, विचार और रंगमंचीय प्रस्तुति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण हिंदी नाट्य-पुस्तक है। नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होता, बल्कि वह समाज, व्यक्ति और समय के प्रश्नों को प्रभावशाली ढंग से सामने लाने की क्षमता रखता है। यह पुस्तक पाठकों को पात्रों और स्थितियों के माध्यम से मानवीय संघर्षों और सामाजिक चेतना को समझने का अवसर देती है।

पुस्तक में नाटकीय संवादों और घटनाओं के जरिए जीवन के विविध पक्षों को प्रस्तुत किया गया है। शीर्षक में मौजूद द्रोणाचार्य और अपराजिता जैसे संकेत पाठकों को परंपरा, संघर्ष, विचार और व्यक्तित्व के स्तर पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। सरल और प्रभावी प्रस्तुति के कारण यह कृति रंगमंच, साहित्य और सामाजिक विषयों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए पठनीय बनती है।

लेखक Vinod Rastogi ने “सुनिए द्रोणाचार्य और अपराजिता” के माध्यम से नाट्य साहित्य को विचारपूर्ण और सहज रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक हिंदी नाटक, संवाद-प्रधान साहित्य और रंगमंचीय अभिव्यक्ति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयुक्त है। विद्यार्थी, साहित्य-प्रेमी और नाट्य-कला से जुड़े पाठक इसे उपयोगी रूप में पढ़ सकते हैं।

Author Name Vinod Rastogi
Publisher True Sign Publishing House
Pages 86
Category Poetry & Drama
Language Hindi
Text Color Black & White
Dimensions 5 x 8 inch

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