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Jiya Kuchh Manat Nahi
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Jiya Kuchh Manat Nahi

Samajik Sarokaron Aur Manaviya Samvedanaon Ka Kahani Sangrah

Author: Dr. Aruna Pathak
ISBN:
जिया कुछ मानत नहीं सामाजिक सरोकारों, स्त्री जीवन और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित हिंदी कहानियों का संग्रह है। इसमें आम जीवन की समस्याओं, रिश्तों की जटिलताओं और बदलते सामाजिक परिवेश से जुड़े प्रसंगों को सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक विचारपूर्ण और संवेदनशील कहानियाँ पढ़ने वाले पाठकों के लिए उपयुक्त है।

“जिया कुछ मानत नहीं” सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित हिंदी कहानियों का संग्रह है। इसमें आम जीवन की परिस्थितियों, रिश्तों की जटिलताओं और समाज में दिखाई देने वाली अनेक समस्याओं को सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है। कहानियाँ पाठकों को परिचित परिवेश से जोड़ती हैं और जीवन के उन पक्षों पर विचार करने का अवसर देती हैं, जिन्हें कई बार सामान्य समझकर अनदेखा कर दिया जाता है।

इस संग्रह में स्त्री जीवन से जुड़े अनुभवों, सामाजिक चुनौतियों और मानवीय व्यवहार के विविध रूपों को संवेदनशील दृष्टि से देखा गया है। कुछ प्रसंग वर्तमान समाज की वास्तविकताओं से जुड़े हैं, जबकि कुछ रचनाएँ पौराणिक विषयों की ओर भी ध्यान आकर्षित करती हैं। सरल भाषा और सहज कथन-शैली के कारण पाठक पात्रों की भावनाओं और परिस्थितियों से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं।

लेखिका Dr. Aruna Pathak ने “जिया कुछ मानत नहीं” के माध्यम से सामाजिक प्रश्नों और मानवीय संवेदनाओं को कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयुक्त है, जो मनोरंजन के साथ विचारशील और संवेदनात्मक हिंदी कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं। संग्रह की रचनाएँ पाठकों को समाज, रिश्तों और जीवन के अनुभवों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती हैं।

Author Name Dr. Aruna Pathak
Publisher True Sign Publishing House
Pages 124
Category Fiction
Language Hindi
Text Color Black & White
Dimensions 5 x 8 inch

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