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Nirmala

Dahej Pratha, Samajik Bandhan Aur Nari Jeevan Ki Marmsparshi Kahani

Author: Premchand
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निर्मला प्रेमचंद का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उपन्यास है, जिसमें दहेज प्रथा, अनमेल विवाह और स्त्री जीवन की पीड़ा को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक समाज की उन कठोर वास्तविकताओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है, जो रिश्तों, परिवार और मानवीय भावनाओं को गहराई से प्रभावित करती हैं।

“निर्मला” हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण सामाजिक उपन्यास है, जो दहेज प्रथा, अनमेल विवाह और स्त्री जीवन की पीड़ा को गहरी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है। कहानी के माध्यम से उस सामाजिक व्यवस्था को समझने का अवसर मिलता है, जहाँ पारिवारिक निर्णय कई बार व्यक्ति के जीवन, भावनाओं और भविष्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

उपन्यास में रिश्तों की जटिलता, अविश्वास, सामाजिक दबाव और स्त्री की असहाय स्थिति को यथार्थपूर्ण रूप में दिखाया गया है। निर्मला का जीवन केवल एक पात्र की कहानी नहीं, बल्कि उस समय के समाज में मौजूद अनेक समस्याओं का प्रतिनिधित्व करता है। सरल भाषा और प्रभावशाली कथन-शैली के कारण यह कृति पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है और सामाजिक प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

लेखक Premchand ने “निर्मला” के माध्यम से भारतीय समाज की गंभीर समस्याओं को मानवीय दृष्टि से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक विद्यार्थियों, साहित्य-प्रेमियों और सामाजिक यथार्थ पर आधारित उपन्यास पढ़ने वाले पाठकों के लिए उपयुक्त है। हिंदी के क्लासिक साहित्य को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक कृति है।

Author Name Premchand
Publisher True Sign Publishing House
Pages 146
Category Fiction
Language Hindi
Text Color Black & White
Dimensions 5 x 8 inch

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