“आत्मनेपद” एक चिंतनपरक हिंदी पुस्तक है, जो मनुष्य के भीतर चलने वाले विचारों, भावनाओं और अनुभवों को समझने की दिशा में पाठकों को आमंत्रित करती है। जीवन में कई ऐसे क्षण आते हैं, जब व्यक्ति बाहरी दुनिया से अधिक अपने अंतर्मन के साथ संवाद करता है। इन्हीं शांत, गंभीर और आत्मीय क्षणों में जीवन से जुड़े अनेक प्रश्न सामने आते हैं और स्वयं को समझने की प्रक्रिया आरंभ होती है।
पुस्तक में आत्मचिंतन, मानवीय संवेदनाओं, संबंधों, स्मृतियों और बदलते जीवन-मूल्यों से जुड़े विचारों को सहज शैली में प्रस्तुत किया गया है। इसमें केवल किसी निष्कर्ष तक पहुँचने का प्रयास नहीं है, बल्कि पाठकों को ठहरकर सोचने और अपने अनुभवों को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर भी मिलता है। पुस्तक का स्वर गंभीर होते हुए भी आत्मीय है, जिससे पाठक विषयों के साथ सहज रूप से जुड़ पाते हैं।
लेखक Dr. Ashish Pandey ने अपने विचारों को स्पष्ट और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया है। हिंदी साहित्य, वैचारिक लेखन और जीवन के विविध पक्षों पर गंभीरता से विचार करने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी और पठनीय है।
| Author Name | Dr. Ashish Pandey |
| Publisher | True Sign Publishing House |
| Pages | 328 |
| Category | Language & Literature |
| Language | Hindi |
| Text Color | Black & White |
| Dimensions | 5 x 8 inch |