विजय पंडित हिंदी रंगमंच, साहित्य, लोकनाट्य और सिनेमा के क्षेत्र में सक्रिय प्रतिष्ठित लेखक, नाटककार, पटकथा-लेखक और रंगनिर्देशक हैं। उनका जन्म वाराणसी जनपद, वर्तमान संत रविदास नगर, के जगन्नाथपुर गाँव में हुआ। गाँव के परिवेश से प्रारम्भ हुई उनकी रचनात्मक यात्रा ने भारतीय रंगमंच और लोकनाट्य परंपरा को व्यापक स्तर पर समृद्ध किया है। वर्तमान में वे मुंबई में रहकर निरंतर लेखन और सृजनात्मक गतिविधियों में संलग्न हैं।
रंगमंच के क्षेत्र में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनके द्वारा लिखित और निर्देशित नाटकों के देश के विभिन्न भागों में 100 से अधिक मंचन हो चुके हैं। उन्होंने रंगमंच को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानकर सामाजिक चेतना, इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति से जोड़ने का कार्य किया है। लोकनाट्य नौटंकी के अध्ययन और संरक्षण में भी उनकी विशेष रुचि रही है। उनकी प्रमुख कृतियों में रंगमंच और स्वाधीनता आन्दोलन, स्वाधीनता आन्दोलन और उन्नाव, लोकनाट्य नौटंकी : कुछ प्रश्न, पिस्तौल, सुनें छत्रपति तथा पूर्ण पुरुष शामिल हैं।
रंगमंच के अतिरिक्त विजय पंडित ने फ़िल्म और टेलीविज़न के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। वे 30 से अधिक फ़िल्मों और धारावाहिकों का लेखन कर चुके हैं। पुर्तगाली कवि फेर्नादो पेसोवा की डायरी पर आधारित उनकी लिखित फ़िल्म अदिति सिंह का प्रदर्शन कांस फ़िल्म फ़ेस्टिवल में हुआ। उनके द्वारा लिखित फ़िल्म जोसेफ बॉर्न इन ग्रेस को ऑस्कर पुरस्कार की एलिजिबल कैटेगरी में स्थान मिला तथा ओंटारियो फ़िल्म फ़ेस्टिवल में लेखन के लिए सम्मानित किया गया।
उनके रचनात्मक और शोधपरक कार्यों को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों तथा फ़ेलोशिप के माध्यम से मान्यता मिली है। उत्तर प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा उन्हें रंगमंच और स्वाधीनता आन्दोलन विषय पर फ़ेलोशिप प्रदान की गई। भारत सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा उन्हें नौटंकी के अध्ययन के लिए भी फ़ेलोशिप प्राप्त हुई। दिल्ली की साहित्य कला परिषद् द्वारा उनके नाटक पूर्ण पुरुष को मोहन राकेश सम्मान प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त उन्हें उत्तर प्रदेश साहित्य सम्मेलन सम्मान, पद्मश्री गुलाबबाई सम्मान, निराला साहित्य संगीत अकादमी सम्मान, डॉ. सुरेश चन्द्र अवस्थी सम्मान, ज्ञानदेव अग्निहोत्री रंग सम्मान, उर्मिल कुमार थपलियाल सम्मान, श्री शारदा पीठ सम्मान तथा पुरी, ओड़िशा में अभिनन्दिका आर्ट फॉर टेलीविज़न एंड थिएटर सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2025 में भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ द्वारा उन्हें भारतेन्दु हरिश्चंद्र सम्मान प्रदान किया गया।
उनकी शीघ्र प्रकाश्य कृतियों में रंग कविता, बकरी : एक अनुशीलन, विनोद रस्तोगी समग्र तथा नायकी देवी शामिल हैं। विजय पंडित का समग्र रचनात्मक योगदान भारतीय रंगमंच, लोकसंस्कृति और साहित्य के प्रति उनकी दीर्घकालीन प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।