डॉ. हिसाम उद्दीन फ़ारूक़ी उर्दू साहित्य, जनसंचार, आकाशवाणी और शैक्षिक प्रसारण के क्षेत्र में सक्रिय एक अनुभवी लेखक, प्रसारक, शिक्षाविद् और संचार विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1953 को भोपाल में हुआ। उनके पिता का नाम स्व. फ़हीम उद्दीन फ़ारूक़ी था। उन्होंने एम.ए. उर्दू, पीएच.डी. तथा एम.ए. जनसंचार की उपाधियाँ प्राप्त कीं। इसके साथ ही उन्होंने बीबीसी लंदन से शैक्षिक टेलीविजन प्रोडक्शन का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया, जिसने उनके प्रसारण और संचार संबंधी कार्यों को अंतरराष्ट्रीय दृष्टि प्रदान की।
डॉ. फ़ारूक़ी का व्यावसायिक जीवन आकाशवाणी से गहराई से जुड़ा रहा है। वे वर्ष 1975 से 1987 तक आकाशवाणी में पूर्व वरिष्ठ उद्घोषक के रूप में कार्यरत रहे। इसके बाद उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में 1987 से 2015 तक उप-निदेशक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। इस दौरान उन्होंने मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा, शैक्षिक प्रसारण, रेडियो और टेलीविजन माध्यमों के प्रभावी उपयोग तथा शैक्षणिक सामग्री निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, भोपाल के पूर्व सचिव भी रहे हैं।
लेखन और प्रकाशन के क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्त्वपूर्ण है। उनकी प्रकाशित कृतियों में An Anthology on Community Radio में समन्वयक के रूप में योगदान, उर्दू ज़बान के फ़रोग़ में रेडियो और टेलीविजन का हिस्सा, फ़िल्मी गीतों में तख़लीक़ियत तथा नज़्म-ओ-ग़ज़ल : सितम-ओ-फ़रार जैसी पुस्तकें उल्लेखनीय हैं। उनके लेखन में उर्दू भाषा, फिल्मी गीतों की रचनात्मकता, जनसंचार माध्यमों की भूमिका और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के विविध आयामों पर गंभीर दृष्टि दिखाई देती है।
डॉ. हिसाम उद्दीन फ़ारूक़ी ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी शैक्षिक और अकादमिक कार्यों में भागीदारी की है। लंदन, पेरिस, बॉन, सिंगापुर, ढाका और कराची जैसे शहरों में उनके शैक्षिक अनुभवों ने उनकी दृष्टि को और व्यापक बनाया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के लिए उन्होंने यूनिट लेखन का कार्य भी किया, जिससे दूरस्थ शिक्षा के विद्यार्थियों को उपयोगी और व्यवस्थित अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकी।
उन्होंने देश के अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थानों में व्याख्यान दिए हैं। इनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली; जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली; जगन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली; स्टाफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, आकाशवाणी, दिल्ली; माधवराव चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, भोपाल आदि प्रमुख हैं। उनके व्याख्यानों में भाषा, प्रसारण, जनसंचार, मीडिया शिक्षा और सांस्कृतिक अध्ययन से जुड़े विषयों पर गहन विचार प्रस्तुत किए जाते रहे हैं।
आकाशवाणी से जुड़े अपने कार्यकाल में उन्होंने खेल प्रसारण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे हॉकी और क्रिकेट के स्पोर्ट्स कमेंटेटर के रूप में भी पहचाने जाते हैं। इस अनुभव ने उनकी भाषा को सहज, प्रभावी और श्रव्य माध्यम के अनुकूल बनाया। यही कारण है कि उनके लेखन और प्रस्तुति में संप्रेषणीयता, प्रवाह और पाठक से सीधा संवाद स्थापित करने की विशेष क्षमता दिखाई देती है।
डॉ. फ़ारूक़ी का लेखन उर्दू और हिंदी के सांस्कृतिक सेतु को मजबूत करता है। विशेष रूप से फिल्मी गीतों में रचनात्मकता जैसे विषय पर उनका कार्य साहित्य, संगीत, सिनेमा और भाषा के पारस्परिक संबंधों को समझने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है। वे फिल्मी गीतों को केवल मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि भाषा, भाव, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम के रूप में देखते हैं।
दीर्घ प्रसारण अनुभव, शैक्षणिक सेवा, उर्दू साहित्य के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और जनसंचार के क्षेत्र में सक्रिय योगदान के कारण डॉ. हिसाम उद्दीन फ़ारूक़ी समकालीन साहित्यिक और मीडिया जगत में एक सम्मानित नाम हैं। उनका कार्य भाषा, शिक्षा, संचार और सांस्कृतिक अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक है।