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Nishkaam Karma, Kartavya Aur Atmavikas Ka Marg

Author: Swami Vivekananda
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कर्मयोग स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक चिंतन से जुड़ी एक प्रेरक पुस्तक है। यह कर्म, कर्तव्य और निस्वार्थ सेवा के महत्व को सरल रूप में समझाती है। पुस्तक पाठकों को परिणाम की चिंता से ऊपर उठकर ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ अपने कार्य करने की दिशा देती है।

“कर्मयोग” कर्म, कर्तव्य और निस्वार्थ सेवा के महत्व को समझाने वाली एक विचारपूर्ण आध्यात्मिक पुस्तक है। जीवन में प्रत्येक व्यक्ति अनेक जिम्मेदारियाँ निभाता है, लेकिन जब कार्य केवल फल की इच्छा या स्वार्थ से जुड़ जाता है, तब मन में तनाव और असंतुलन बढ़ सकता है। यह पुस्तक पाठकों को समर्पण और जागरूकता के साथ कर्म करने की दिशा देती है।

पुस्तक में यह विचार प्रमुख रूप से सामने आता है कि सही भावना से किया गया कार्य व्यक्ति के आत्मिक विकास का माध्यम बन सकता है। निस्वार्थ कर्म, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति ईमानदारी मनुष्य के भीतर संतुलन और आत्मविश्वास विकसित करते हैं। यह कृति पाठकों को अपने दैनिक जीवन, व्यवहार और कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

स्वामी विवेकानंद के प्रेरक विचारों से जुड़ी “कर्मयोग” भारतीय आध्यात्मिक चिंतन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी पुस्तक है। सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत यह कृति उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो कर्म, सेवा और आत्मविकास के बीच संबंध को समझना चाहते हैं तथा अपने जीवन में अधिक संतुलित और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहते हैं।

Author Name Swami Vivekananda
Publisher True Sign Publishing House
Pages 92
Category Spirituality & Philosophy
Language Hindi
Text Color Black & White
Dimensions 5 x 8 inch

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