संतोष सुमन वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक-राजनीतिक विषयों के गंभीर अध्येता हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्होंने भारतीय समाज, राजनीति, लोकतांत्रिक आंदोलनों और जन-सरोकारों को निकट से देखा और समझा है। उनकी लेखनी में तथ्य, विश्लेषण और संवेदनशील दृष्टि का संतुलित समन्वय दिखाई देता है।
संतोष सुमन का लेखन केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि उनके पीछे छिपे सामाजिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक कारणों को भी समझने का प्रयास करता है। वे उन विषयों को विशेष महत्त्व देते हैं, जिनका संबंध आम जनता, लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और व्यवस्था में परिवर्तन की आकांक्षा से जुड़ा होता है।
उनकी पुस्तक जे.पी. आंदोलन 1974 जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक आंदोलन का गंभीर अध्ययन प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में उन्होंने उस समय के सामाजिक और राजनीतिक वातावरण, जनता के असंतोष, संपूर्ण क्रांति के विचार और भारतीय लोकतंत्र पर पड़े उसके दूरगामी प्रभावों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
साक्षात्कारों, व्यक्तिगत अनुभवों और अपने अवलोकनों के आधार पर संतोष सुमन ने इस आंदोलन को केवल इतिहास की एक घटना के रूप में नहीं, बल्कि जनचेतना और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीवंत कहानी के रूप में सामने रखा है। इतिहास, राजनीति और भारतीय लोकतंत्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उनका लेखन उपयोगी और विचारोत्तेजक है।