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Kamlesh Kamal

Hindi Linguist, Grammarian, Author and Public Relations Officer, ITBP

कमलेश कमल हिंदी के प्रतिष्ठित भाषाविद्, वैयाकरण और लेखक हैं। वे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) के महानिदेशालय में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ वे हिंदी भाषा, व्याकरण और शब्दों के शुद्ध प्रयोग को लेकर निरंतर सक्रिय हैं। ITBP के आधिकारिक प्रेस नोटों में उनका उल्लेख जनसंपर्क अधिकारी के रूप में मिलता है।

 

भाषा के प्रति उनका दृष्टिकोण केवल व्याकरणिक नियमों तक सीमित नहीं है। वे शब्दों की उत्पत्ति, उनके अर्थ-विकास, सही उच्चारण और संदर्भ के अनुसार उनके उपयुक्त प्रयोग पर विशेष बल देते हैं। सरल और सहज शैली में वे ऐसे शब्दों के बीच अंतर स्पष्ट करते हैं, जो सामान्य प्रयोग में प्रायः एक जैसे मान लिए जाते हैं। उनकी लेखनी विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, पत्रकारों और हिंदी भाषा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है।

 

दूरदर्शन के DD Morning Show में प्रसारित ‘हिंदी पाठशाला’ के माध्यम से वे हिंदी भाषा की बारीकियों को सरल तरीके से समझाते हैं। इस कार्यक्रम में उन्होंने ‘यह’ और ‘ये’, ‘आरोप’ और ‘आक्षेप’, ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’, ‘वास्तविकता’ और ‘यथार्थ’, ‘स्थिति’ और ‘परिस्थिति’ तथा ‘की’ और ‘कि’ जैसे शब्दों और प्रयोगों के बीच अंतर स्पष्ट किया है।

 

उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘भाषा संशय-शोधन’, ‘शब्द-संधान’ और ‘ऑपरेशन बस्तर : प्रेम और जंग’ शामिल हैं। ‘भाषा संशय-शोधन’ और ‘शब्द-संधान’ हिंदी भाषा के शुद्ध एवं सटीक प्रयोग पर केंद्रित हैं। इन पुस्तकों में शब्दों की व्युत्पत्ति, अर्थ और प्रयोग से जुड़े संशयों को तार्किक तथा व्यावहारिक रूप से समझाया गया है। वहीं, ‘ऑपरेशन बस्तर : प्रेम और जंग’ उनका उपन्यास है, जिसकी कथाभूमि बस्तर है।

 

कमलेश कमल का लेखन हिंदी को अधिक सहज, स्पष्ट और प्रभावशाली बनाने का प्रयास है। उनका उद्देश्य पाठकों को केवल शुद्ध भाषा का ज्ञान देना नहीं, बल्कि शब्दों के पीछे छिपे अर्थ, इतिहास और सांस्कृतिक संदर्भों से भी परिचित कराना है।

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