लक्ष्मी शर्मा समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय और संवेदनशील रचनाकार हैं। उनका जन्म 25 जून 1964 को इंदौर में हुआ। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से हिंदी साहित्य में एमए तथा राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से एमफिल और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। लंबे समय तक हिंदी की प्राध्यापिका के रूप में सेवाएँ देने के पश्चात वे सेवानिवृत्त हुईं। वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन के माध्यम से साहित्य-सृजन में निरंतर सक्रिय हैं।
उनकी रचनाओं में स्त्री-जीवन, सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंधों और बदलते परिवेश की सूक्ष्म संवेदनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं। उनके प्रकाशित उपन्यासों में सिधपुर की भगतणें, स्वर्ग का अंतिम उतार, लीला तथा गाथा एक कुप्रसिद्ध इंदौरी औरत की उल्लेखनीय हैं। उनके कहानी-संग्रह एक हँसी की उम्र और रानियाँ रोती नहीं पाठकों के बीच सराहे गए हैं। दुबई प्रवास के अनुभवों पर आधारित उनकी डायरी रेत में रमती योगमाया : दुबई भी प्रकाशित हो चुकी है।
आलोचना और विवेचना के क्षेत्र में भी उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। उनके विवेचना-ग्रंथों में मोहन राकेश के साहित्य में पात्र-संरचना तथा जलप्रलय में भीगते ज्वालामुखी : मोहन राकेश के पात्र विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। संपादक के रूप में उन्होंने स्त्री-सरोकारों से जुड़ी कविताओं के संकलन स्त्री होकर सवाल करती है तथा आधुनिक काव्य संकलन का संपादन किया है।
साहित्य-सृजन के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। उनके उपन्यास स्वर्ग का अंतिम उतार को वर्ष 2020 में अंतरराष्ट्रीय शिवना सम्मान प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश प्रेस क्लब द्वारा उन्हें मध्यप्रदेश प्रतिभा अलंकार सम्मान 2022 से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त सृजन सेवा संस्थान, श्रीगंगानगर द्वारा उन्हें भूरीदेवी-चंपालाल बैद कथा-सृजन सम्मान 2023 प्रदान किया गया।
लक्ष्मी शर्मा का लेखन सामाजिक चेतना, साहित्यिक गंभीरता और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।