डॉ. अनिल कुमार दीक्षित विधि, शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में सक्रिय एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं। 1973 में उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में जन्मे डॉ. दीक्षित की शिक्षा-दीक्षा आगरा में ही हुई। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और पीएचडी की उपाधियाँ अर्जित कीं। विधि और समाज के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उनके अध्ययन और लेखन को व्यापक दृष्टि प्रदान की।
डॉ. दीक्षित की सार्वजनिक जीवन यात्रा पत्रकारिता से प्रारंभ हुई। उन्होंने आगरा के हिंदी दैनिक आज से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की और लगभग बारह वर्षों तक विभिन्न राष्ट्रीय समाचार-पत्रों में संपादकीय दायित्वों का निर्वहन किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक विषयों पर नियमित रूप से लेख लिखे, जिनमें समाज के बदलते स्वरूप, न्याय व्यवस्था और जनहित से जुड़े प्रश्नों को गंभीरता से उठाया गया। पत्रकारिता के अनुभव ने उनके लेखन को तथ्यपरकता, संवेदनशीलता और सामाजिक दृष्टि से समृद्ध किया।
शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. अनिल कुमार दीक्षित का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने आगरा के विधि महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक, एसोसिएट प्रोफेसर और प्राचार्य के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ स्थित महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विधि प्रोफेसर और रिसर्च डीन के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। वर्तमान में वे भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध करियर कॉलेज ऑफ लॉ में प्रोफेसर और प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। अध्यापन और शोध के क्षेत्र में उनका अनुभव उन्हें विधि शिक्षा के एक गंभीर और समर्पित अध्येता के रूप में स्थापित करता है।
डॉ. दीक्षित ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक सेमिनारों, कार्यशालाओं और अकादमिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी की है। उन्होंने कई शोध-पत्र प्रस्तुत और प्रकाशित किए हैं, जिनमें कानून, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय न्याय, प्रत्यर्पण कानून और सामाजिक न्याय से जुड़े महत्त्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार किया गया है। उनकी पुस्तकें विधि के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अधिवक्ताओं और विषय में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी स्रोत के रूप में देखी जाती हैं।
मानवाधिकार संरक्षण, विधिक जागरूकता और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे केवल एक विधि शिक्षक या लेखक नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे चिंतनशील व्यक्ति हैं जो कानून को समाज के जीवन से जोड़कर देखते हैं। विभिन्न स्तरों पर उन्हें उनके शैक्षणिक, सामाजिक और विधिक योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
दीर्घ अकादमिक अनुभव, पत्रकारिता की गंभीर पृष्ठभूमि, सामाजिक प्रतिबद्धता और विधि के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय योगदान के कारण डॉ. अनिल कुमार दीक्षित समकालीन विधि शिक्षा और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में एक सम्मानित और विशिष्ट स्थान रखते हैं।