“ग्वालियर के गली, बाजार, मोहल्ले: खंड-3” शहर की स्मृतियों, स्थानीय जीवन और बदलते सामाजिक परिवेश को समझने वाली पुस्तक है। किसी शहर की पहचान केवल उसकी प्रसिद्ध इमारतों या ऐतिहासिक स्थलों से नहीं बनती, बल्कि उसकी गलियों, बाजारों और मोहल्लों में बसने वाले लोगों, परंपराओं और रोजमर्रा के अनुभवों से भी निर्मित होती है। यह पुस्तक ग्वालियर के इसी आत्मीय और जीवंत स्वरूप को सामने लाती है।
पुस्तक में शहर के अलग-अलग इलाकों से जुड़ी स्मृतियों, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक परिवेश को सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है। पुराने बाजारों, परिचित मोहल्लों और बदलती जीवनशैली के माध्यम से पाठकों को ग्वालियर के स्थानीय इतिहास की झलक मिलती है। यह कृति केवल स्थानों का उल्लेख नहीं करती, बल्कि उन अनुभवों को भी महत्व देती है जो किसी शहर को उसके निवासियों के लिए विशेष बनाते हैं।
लेखक Mata Prasad Shukl ने “ग्वालियर के गली, बाजार, मोहल्ले: खंड-3” के माध्यम से शहर की स्मृतियों और सामाजिक विरासत को पठनीय रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक ग्वालियर से जुड़ाव रखने वाले पाठकों, स्थानीय इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और भारतीय शहरों की सांस्कृतिक पहचान को समझना चाहने वाले पाठकों के लिए उपयुक्त है।
| Author Name | |
| Publisher | True Sign Publishing House |
| Pages | 90 |
| Category | Non-Fiction |
| Language | Hindi |
| Text Color | Black & White |
| Dimensions | 5 x 8 inch |